भगवान भी शर्मिंदा हुए करनाल के कुबेरपति से?

करनाल। दौलत से बहुत कुछ खरीदा जा सकता है। सुई से लेकर हवाई जहाज तक। झोपड़ी से लेकर महल तक। कांच के बर्तन से लेकर सोने के बर्तन तक? संसार में जो कुछ भी भौतिक तौर पर दिखाई देता है लगभग हर चीज किसी न किसी दाम में खरीदी जा सकती है। लेकिन एक चीज है जो कुबेरपति भी नहीं खरीद सकते हैं वो है दिल? वो है जिगरा? तो आज हम बात करेंगे करनाल के एक ऐसे कुबेरपति की जिसके दान के आगे भगवान भी शर्मिंदा हो गए? एक ऐसे कुबेरपति की जिसकी करनाल में अगर तुलना की जाएं तो दौलत के मामले में वो नंबर एक पर है? एक ऐसा कुबेरपति जिसके पास न महलों की कमी है न गॉडिय़ों, और बंगलों की कमी है। इस कुबेरपति ने भगवान के मंदिर में जो कुछ किया वह हैरान कर देने वाला वाक्या है। बात आज इसलिए अहम है क्योंकि इस कुबेरपति को हाल ही में एक अहम ओहदे से नवाजा गया है। लेकिन आज एक संस्था के लोगों ने जो खुलासा इस कुबेरपति के बारे में किया वह सोचने के लिए मजबूर कर देता है कि क्या कोई ऐसा भी कर सकता है वो भी भगवान के मंदिर में खड़ा होकर।
तो इस कुबेरपति की पूरी कहानी अब विस्तार से सुनिए। करनाल के रघुनाथ मंदिर में भगवान के घर मार्बल लगाया जाना था ताकि मंदिर की भव्यता और सुंदरता को बढ़ाया जा सकें। मंदिर सभा के लोगों ने इस कुबेरपति को मंदिर में बुलाया। मान सम्मान दिया। सभा के लोगों ने इस कुबेरपति को बताया कि भगवान के घर को सजाने के लिए मार्बल लगवाना चाहते हैं। कुबेरपति ने बिना झिझके, बिना कुछ सोचे, बिना कोई वक्त गंवाएं पूरे कार्यक्रम में ऐलान कर दिया कि मंदिर में मार्बल हम लगवाएंगे। तालियां बजी। जयघोष हुआ। कुबेरपति के दान के चर्चों से मंदिर का प्रांगण और शहर के कई सामाजिक संगठन गुलजार रहें। सभा के लोगों ने मंदिर में पत्थर लगवाया। एक नेम प्लेट भी इस कुबेरपति के नाम की लगवाई ताकि ये यादगार बनी रहें कि मंदिर के प्रांगण में फंला कुबेरपति ने पत्थर लगाने के लिए पांच लाख रुपए की भेंट राशि दी है? अब बारी थी पैसे लेने की। मंदिर के प्रधान, चेयरमैन इत्यादि कुबेरपति के पास पहुंचे। कहा कि आपकी दयालुता से पत्थर लग गया है। अब उदघाटन करना है। जो वचन आपने दिया था अब उसे पूरा कीजिए। कुबेरपति ने चैक बुक मंगवाई। पैसे भरे और चैक मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया। मंदिर सभा के लोगों ने चैक हाथ में लिया और उसमे लिखी राशि को देखा तो उनके होश फाख्ता हो गए? चैक में लिखी गई रकम पर मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों को यकीन ही नहीं हुआ। चैक को देख कर उनका एक भाव आ रहा था तो दूसरा भाव जा रहा था। दरअसल चैक में 5 लाख रुपए की बजाय 21 हजार रुपए की राशि भरी गई थी। मंदिर सभा के लोगों ने वायदा और ऐलान याद दिलाया तो कुबेरपति ने कहा कि हमारे यहां तो ऐसे दर्जनों लोग आते हैं। हम भी ऐसी ही घोषणाएं करते हैं। अगर हम अपनी घोषणाओं के हिसाब से चैक काटने लगे तो फिर हमारी तो लुटिया डूब जाएगी। मंदिर सदस्यों ने विनम्रता से चैक लौटा दिया। कुबेरपति ने अपना खजाने को बढ़ाने के लिए चैक वापस रख लिया। मंदिर के सदस्य मंदिर में गए और सबसे पहले कुबेरपति की नेम प्लेट को वहां से हटा कर एक कोने में रख दिया, ताकि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं में ये भ्रम न फैले कि इस कुबेरपति ने मंदिर को इतना बड़ा दान दिया है। बहरहाल अब जब कुबेरपति को एक बड़े ओहदे से नवाजा गया है तो एक बार फिर से इस किस्से की चर्चा शहर भर में शुरू हो गई है। कहने वाले कह रहे हैं कि इस कुबेरपति के दान से भगवान भी शर्मिंदा है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *